UGC New Rule: इस्तीफा देने वाले बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री हुए सस्पेंड, जांच का सामना करेंगे

Press Trust of India | January 27, 2026 | 01:53 PM IST | 2 mins read

अग्निहोत्री ने केंद्र और राज्य सरकारों में ब्राह्मण समुदाय के चुने हुए प्रतिनिधियों से अपने पदों से इस्तीफा देने और समुदाय के साथ खड़े होने की अपील की।

अलंकार अग्निहोत्री को अनुशासनहीनता के आरोप में सस्पेंड कर दिया गया है। (इमेज-एक्स/@KantReports)

लखनऊ: उत्तर प्रदेश सरकार ने बरेली के नगर मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री को अनुशासनहीनता के आरोप में निलंबित कर दिया। आधिकारिक सूत्रों ने मंगलवार को यह जानकारी दी। इससे पहले अग्निहोत्री ने सरकारी नीतियों विशेषकर विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के नए नियमों से जुड़े मामले पर नाराजगी जताते हुए सोमवार को पद से इस्तीफा दे दिया था, जिससे एक बड़ा प्रशासनिक और राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया।

अग्निहोत्री को अनुशासनहीनता के आरोप में सस्पेंड कर दिया गया है और साथ ही उन्हें जिलाधिकारी शामली के कार्यालय से सम्बद्ध कर दिया गया है। यह आदेश अपॉइंटमेंट सेक्शन-7 की स्पेशल सेक्रेटरी अन्नपूर्णा गर्ग ने जारी किया।

UGC New Rule: जांच अधिकारी नियुक्त किया गया

डिपार्टमेंटल कार्रवाई के तहत, आरोपों की जांच के लिए बरेली के डिविजनल कमिश्नर बीएस चौधरी को जांच अधिकारी नियुक्त किया गया है। अलंकार अग्निहोत्री ने इस्तीफा ईमेल से राज्यपाल और बरेली के डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट को भेजा था।

अपने इस्तीफे के साथ दिए गए बयान में, उन्होंने नए यूजीसी नियमों को "काले कानून" बताया। अपने तीखे बयान में, अग्निहोत्री ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने यूजीसी नियमों को लेकर केंद्र सरकार पर सीधा हमला भी किया।

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UGC Guidelines: अलंकार अग्निहोत्री की प्रतिनिधियों से अपील

अग्निहोत्री ने केंद्र और राज्य सरकारों में ब्राह्मण समुदाय के चुने हुए प्रतिनिधियों से अपने पदों से इस्तीफा देने और समुदाय के साथ खड़े होने की अपील की। उन्होंने दावा किया कि सामान्य वर्ग के लोग दोनों सरकारों से तेज़ी से दूर होते जा रहे हैं।

यूजीसी ने आदेश दिया है कि हर यूनिवर्सिटी और कॉलेज धर्म, जाति, लिंग, जन्म स्थान और विकलांगता के आधार पर भेदभाव को रोकने के लिए एक इक्विटी सेंटर बनाए। यूजीसी ने जाति-आधारित भेदभाव को रोकने के लिए नए नियम लागू किए हैं।

ताकि एससी, एसटी और ओबीसी के छात्रों की शिकायतों का समाधान किया जा सके। हालांकि, जनरल कैटेगरी के कुछ लोगों का मानना है कि यह नया नियम जनरल कैटेगरी के छात्रों के उत्पीड़न का माध्यम बन सकता है।

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