Santosh Kumar | May 22, 2026 | 12:06 PM IST | 2 mins read
कोर्ट ने कहा कि भर्ती प्रक्रिया के लिए न्यूनतम क्वालिफाइंग अंक तय करना अनिवार्य है। ऐसे न्यूनतम अंक तय किए बिना भर्ती करना असंवैधानिक माना जाएगा। कोर्ट ने बोर्ड को ये न्यूनतम क्वालिफाइंग अंक तय करने की छूट दी है।

नई दिल्ली: राजस्थान स्टाफ सिलेक्शन बोर्ड (आरएसएसबी) द्वारा जारी चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी भर्ती 2025 रिजल्ट को राजस्थान हाई कोर्ट ने रद्द कर दिया है। अदालत ने न्यूनतम अंक को अनिवार्य मानते हुए यह फैसला सुनाया है। राजस्थान हाई कोर्ट के इस फैसले से अभ्यर्थियों की उम्मीदें प्रभावित हुई हैं, जबकि बोर्ड को नई प्रक्रिया अपनाकर दोबारा परिणाम जारी करने के निर्देश दिए गए हैं।
हाईकोर्ट ने चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी भर्ती में अलग-अलग कैटेगरी की मेरिट लिस्ट को रद्द किया है। अदालत ने विनोद कुमार की याचिका पर शुक्रवार को फैसला सुनाते जीरो कट ऑफ वाली कैटेगरी की मेरिट लिस्ट को रद्द कर दिया।
कोर्ट ने कहा कि भर्ती प्रक्रिया के लिए न्यूनतम क्वालिफाइंग अंक तय करना अनिवार्य है। ऐसे न्यूनतम अंक तय किए बिना भर्ती करना असंवैधानिक माना जाएगा। कोर्ट ने बोर्ड को ये न्यूनतम क्वालिफाइंग अंक तय करने की छूट दी है।
अदालत ने कहा कि भले ही पद 'क्लास 4' श्रेणी का हो, लेकिन सरकारी सेवा में एक बेसिक स्टैंडर्ड का होना जरूरी है। यह परीक्षा 53,750 पदों को भरने के लिए हुई। अदालत ने विशेष रूप से 16 जनवरी को घोषित परिणामों को रद्द किया है।
जस्टिस आनंद शर्मा की बेंच की अध्यक्षता करते हुए, कोर्ट ने विनोद कुमार द्वारा दायर एक याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने विभिन्न श्रेणियों के प्रारंभिक नतीजों को रद्द किया, जिनमें पूर्व सैनिक, विधवाएं और दिव्यांग व्यक्ति शामिल हैं।
कोर्ट ने टिप्पणी की, "ये रिजल्ट बिना किसी निर्धारित मापदंड के प्रकाशित किए गए, और अंकों से संबंधित अनिवार्य आवश्यकता पर कोई विचार नहीं किया गया।" इस मामले में याचिकाकर्ता का प्रतिनिधित्व एडवोकेट हरेंद्र नील ने किया।
याचिका में अधिवक्ता हरेंद्र नील ने बताया कि याचिकाकर्ता ने ओबीसी भूतपूर्व सैनिक श्रेणी में आवेदन किया था। परीक्षा में याचिकाकर्ता के 0.65 अंक आए और प्री डीवी परिणाम में उसे चयन प्रक्रिया से बाहर कर दिया गया।
याचिका में कहा गया की नियुक्ति के लिए चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी भर्ती में कोई न्यूनतम अंक लाने की बाध्यता नहीं रखी गई थी। ऐसे में पद रिक्त रहने पर नेगेटिव अंक लाने वाले अभ्यर्थी का भी चयन किया जाना चाहिए था।
याचिका में दावा किया गया कि चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी भर्ती में एक वर्ग की कट ऑफ 0.003 आई है। ऐसे में याचिकाकर्ता को भी नियुक्ति दी जाए, जिस पर सुनवाई करते हुए एकलपीठ ने कई कैटेगिरी की मेरिट लिस्ट को रद्द कर दिया है।