Press Trust of India | January 22, 2026 | 10:17 AM IST | 1 min read
याचिका में एनबीईएमएस के निर्णय को चुनौती दी गई है कि नीट-पीजी 2025 के लिए कट-ऑफ अंकों में उल्लेखनीय कटौती से मेरिट के आधार पर चयन प्रक्रिया की पवित्रता कमजोर होगी।
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प्रयागराज: नीट-पीजी 2025 की परीक्षाओं में 800 अंकों में से -40 अंक हासिल करने वाले एससी/एसटी/ओबीसी विद्यार्थियों को काउंसलिंग में बैठने की अनुमति देने के राष्ट्रीय चिकित्सा विज्ञान परीक्षा बोर्ड (एनबीईएमएस) के निर्णय को चुनौती देते हुए इलाहाबाद उच्च न्यायालय में एक जनहित याचिका दायर की गई है।
अधिवक्ता याचिकाकर्ता अभिनव गौर ने इस कदम को संविधान के अनुच्छेद-16 का उल्लंघन करने वाला असंवैधानिक कदम बताया है। यह अनुच्छेद सरकारी नौकरियों के मामले में समान अवसर उपलब्ध कराता है।
याचिका में इस आधार पर एनबीईएमएस के निर्णय को चुनौती दी गई है कि नीट-पीजी 2025 के लिए कट-ऑफ अंकों में उल्लेखनीय कटौती से मेरिट के आधार पर चयन प्रक्रिया की पवित्रता कमजोर होगी।
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जनहित याचिका में कहा गया है कि दूसरे दौर की काउंसिलिंग के बाद 18,000 से अधिक सीटें खाली रहने पर बोर्ड ने योग्यता के मानक जबरदस्त ढंग से घटा दिए जिसमें एससी, एसटी और ओबीसी के लिए अंक -40 तय किया गया।
याचिकाकर्ता ने संकेत दिया कि सामान्य (ईडबल्यूएस) वर्ग में कट ऑफ 276 से घटाकर 103 कर दिया गया, जबकि सामान्य (पीडब्लूबीडी) वर्ग में इसे 255 से घटाकर 90 कर दिया गया है। वहीं, एससी/एसटी/ओबीसी वर्ग में इसे 235 से घटाकर -40 कर दिया गया जिससे जनस्वास्थ्य और मरीज की सुरक्षा बुरी तरह प्रभावित होगी।
याचिका में यह दलील भी दी गई है कि इस परीक्षा को उत्तीर्ण करने की न्यूनतम योग्यता नहीं रखने वाले ऐसी गुणवत्ता के डॉक्टरों से संविधान के अनुच्छेद-21 के तहत स्वास्थ्य और जीवन का अधिकार प्रभावित होगा। इस जनहित याचिका पर जल्द ही सुनवाई किए जाने की संभावना है।