Press Trust of India | May 4, 2026 | 10:43 PM IST | 3 mins read
आरोपियों ने छात्रों के परिवारों से कथित रूप से 20 से 30 लाख रुपये की मांग की और मेडिकल कॉलेजों में सीट दिलाने की गारंटी देते हुए कुछ पैसा ले भी लिया।
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नई दिल्ली: दिल्ली पुलिस ने एक संगठित गिरोह का खुलासा किया है जो नीट अभ्यर्थियों और उनके परिवारों को एमबीबीएस में प्रवेश दिलाने के नाम पर कथित रूप से ठगी करता था। इस बाबत संदिग्ध सरगना और एक डॉक्टर सहित चार लोगों को गिरफ्तार किया गया है। एक अधिकारी ने बताया कि 3 मई को हुई राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET UG) 2026 परीक्षा से पहले कुछ नाबालिग समेत 18 विद्यार्थियों को इन ठगों के चंगुल से बचाया।
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आरोपी उन्हें “परीक्षा प्रश्न” उपलब्ध कराने के बहाने अज्ञात स्थानों पर ले जा गए थे। आरोप है कि “फर्जी” प्रश्न पत्र पिछले वर्षों की सामग्री और कोचिंग संस्थानों की सामग्री का उपयोग करके बनाए गए थे। आरोपियों ने छात्रों के परिवारों से कथित रूप से 20 से 30 लाख रुपये की मांग की और मेडिकल कॉलेजों में सीट दिलाने की गारंटी देते हुए कुछ पैसा ले भी लिया।
अधिकारी ने बताया कि सूरत पुलिस से 2 मई को सूचना मिली कि दिल्ली में एक संदिग्ध गिरोह नीट के माध्यम से मेडकिल कॉलेजों में प्रवेश दिलाने का दावा कर रहा है जिसके बाद कार्रवाई शुरू की गई और तकनीकी निगरानी के आधार पर जांचकर्ता महिपालपुर एक्सटेंशन पहुंचे, जहां कई होटलों की तलाशी ली।
पुलिस ने होटल में ठहरे 4 आरोपियों को पकड़ा, जिनमें विनोद भाई भीखा भाई पटेल भी शामिल था, जिसने एमबीबीएस में दाखिला लेने के गुजरात के इच्छुक छात्रों को बहला-फुसलाकर कथित तौर पर अपने जाल में फंसाया था। पूछताछ के दौरान पता चला कि आरोपियों ने एमबीबीएस में सीट दिलाने का वादा कर अभिभावकों से बड़ी रकम, कक्षा 10वीं और 12वीं की मूल मार्कशीट और हस्ताक्षर किए गए खाली चेक भी लिए।
जांचकर्ताओं ने बताया कि आरोपियों ने कुछ छात्रों को उनके अभिभावकों से अलग कर दिया था। पुलिस ने गाजियाबाद के एक अस्पताल के पास जाल बिछाकर तीन छात्रों को बचाया और कथित मास्टरमाइंड संतोष कुमार जायसवाल को गिरफ्तार कर लिया। गाजियाबाद के एक फ्लैट पर छापेमारी के बाद 15 और छात्रों को बचाया गया, जिनमें से कुछ नाबालिग थे और 3 मई को नीट परीक्षा देने वाले थे।
पुलिस के अनुसार, उन्हें समझाया गया और परीक्षा में बैठने की अनुमति दी गई। फ्लैट से दो और आरोपियों - संत प्रताप सिंह और डॉ. अखलाक आलम उर्फ गोल्डन आलम - को गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने बताया कि गिरोह ने मेडिकल कॉलेज में दाखिला लेने के इच्छुक विद्यार्थियों की आकांक्षाओं का फायदा उठाने के लिए एक सुनियोजित कार्यप्रणाली तैयार की थी।
आरोप है कि जायसवाल ने साजिश रची, जबकि आलम ने पिछले वर्षों की सामग्री और कोचिंग संस्थानों की सामग्री का उपयोग करके फर्जी प्रश्न पत्र तैयार किए। सिंह ने साजो समान और आवास की व्यवस्था की, और पटेल ने परिवारों से संपर्क करने के लिए बिचौलिए की भूमिका निभाई। आरोपियों ने कथित तौर पर प्रत्येक आवेदक से 20 से 30 लाख रुपये की मांग की और धोखाधड़ी के तहत अग्रिम भुगतान के तौर पर कुछ पैसे, दस्तावेज और चेक लिए।
इस अभियान के दौरान, पुलिस ने कथित प्रश्न-उत्तर सामग्री के 149 पृष्ठ, पीड़ितों से संबंधित हस्ताक्षर किए गए तीन खाली चेक और अन्य आपत्तिजनक दस्तावेज बरामद किए। भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है और गिरोह के अन्य सदस्यों की पहचान करने के लिए आगे की जांच जारी है।