Press Trust of India | January 25, 2026 | 06:42 PM IST | 1 min read
तमिलनाडु के सीएम एमके स्टालिन ने तर्क दिया कि नीट में मात्र उपस्थित होना योग्यता का मानदंड तय करना तर्कसंगत नहीं है।

नई दिल्ली: तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से आग्रह किया कि वह यह सुनिश्चित करें कि बीपीटी और बीओटी प्रवेश से नीट को अलग रखा जाए। सीएम ने कहा कि प्रवेश संबंधी तौर-तरीके राज्यों के अधिकार क्षेत्र में ही रहने चाहिए।
उन्होंने तर्क दिया कि नीट में मात्र उपस्थित होना योग्यता का मानदंड तय करना तर्कसंगत नहीं है। उन्होंने कहा कि वैश्विक स्तर पर शैक्षणिक पात्रता या तो परीक्षा उत्तीर्ण करने अथवा उसमें उच्च अंक प्राप्त करने के आधार पर निर्धारित की जाती है।
मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री को लिखे एक पत्र में कहा, ‘‘केवल उपस्थिति अनिवार्य करने का कोई अकादमिक औचित्य नहीं है और ऐसा प्रतीत होता है कि इसे समाज में नीट को सामान्य बनाने और उसका विस्तार करने के लिए ही बनाया गया है। इससे अंततः देश के लाखों लोगों को कोचिंग लेने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।’’
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राष्ट्रीय सहबद्ध और स्वास्थ्य देख-रेख वृत्ति आयोग (एनसीएएचपी) ने संबद्ध स्वास्थ्य पाठ्यक्रमों में प्रवेश को मानकीकृत करने के लिए इस शैक्षणिक वर्ष से ‘बैचलर ऑफ फिजियोथेरेपी’ और ‘बैचलर ऑफ ऑक्यूपेशनल थेरेपी’ में प्रवेश के लिए राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा को अनिवार्य कर दिया है।
मुख्यमंत्री ने पत्र में कहा, ‘‘इस मुद्दे की गंभीरता को देखते हुए, मैं आपके व्यक्तिगत हस्तक्षेप की उम्मीद करता हूं।’’ उन्होंने दावा किया कि राज्यों से, जो संवैधानिक रूप से स्वास्थ्य और शिक्षा दोनों क्षेत्रों के प्रभारी हैं, इस नवीनतम कदम पर परामर्श नहीं किया गया। स्टालिन ने कहा, ‘‘यह हमें बिल्कुल भी स्वीकार्य नहीं है।’’