Press Trust of India | February 4, 2026 | 04:32 PM IST | 2 mins read
देश भर में 18,000 से अधिक स्नातकोत्तर मेडिकल सीट खाली रहने के कारण बोर्ड ने राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट पीजी) 2025 प्रवेश के लिए पात्रता पर्सेंटाइल को संशोधित किया है।
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नई दिल्ली: उच्चतम न्यायालय (SC) ने आयुर्विज्ञान में राष्ट्रीय परीक्षा बोर्ड (NBEMS) द्वारा नीट पीजी 2025-26 में दाखिले के लिए पात्रता कटऑफ पर्सेंटाइल में भारी कमी करने के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर 4 फरवरी को केंद्र और अन्य से जवाब मांगा। न्यायमूर्ति पीएस नरसिम्हा और न्यायमूर्ति आलोक अराधे की पीठ ने भारत सरकार, एनबीईएमएस, राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग (एनएमसी) और अन्य को नोटिस जारी किए हैं।
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मामले की अगली सुनवाई 6 फरवरी को होगी। देश भर में 18,000 से अधिक स्नातकोत्तर मेडिकल सीट खाली रहने के कारण बोर्ड ने राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट पीजी) 2025 प्रवेश के लिए पात्रता पर्सेंटाइल को संशोधित किया है।
आरक्षित श्रेणियों के लिए इसे 40 प्रतिशत से घटाकर शून्य कर दिया है जिससे कम अंक प्राप्त करने वाले अभ्यर्थी भी स्नातकोत्तर मेडिकल सीट के लिए काउंसलिंग के तीसरे दौर में शामिल हो सकेंगे। एनबीईएमएस द्वारा जारी नोटिस के अनुसार, सामान्य वर्ग के लिए नीट पीजी का कटऑफ 50 पर्सेंटाइल से घटाकर 7 पर्सेंटाइल कर दिया गया है।
शीर्ष अदालत सामाजिक कार्यकर्ता हरिशरण देवगन, डॉ. सौरभ कुमार, डॉ. लक्ष्य मित्तल और डॉ. आकाश सोनी द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रही है, जिसमें यह दलील दी गई थी कि कट-ऑफ में कमी संविधान के अनुच्छेद 14 और अनुच्छेद 21 का उल्लंघन करती है।
याचिका में यह दलील दी गई है कि चयन प्रक्रिया शुरू होने के बाद पात्रता मानदंड को बदला नहीं जा सकता क्योंकि उम्मीदवारों ने मूल रूप से अधिसूचित कट-ऑफ के आधार पर तैयारी की, प्रतिस्पर्धा की और करियर संबंधी विकल्प चुने।
याचिका में कहा गया है कि स्नातकोत्तर चिकित्सा शिक्षा को व्यावसायिक गतिविधि नहीं माना जा सकता है और नियामक प्राधिकरणों को मानकों में गिरावट को रोकने की आवश्यकता है। चिकित्सा जगत के कई वर्गों ने एनबीईएमएस द्वारा नीट-पीजी 2025-26 के लिए सभी श्रेणियों के उम्मीदवारों के कट-ऑफ पर्सेंटाइल को घटाने संबंधी निर्णय को ''अभूतपूर्व और अतार्किक'' करार दिया है।