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संसदीय समिति कोचिंग सेंटरों के बढ़ते प्रसार और इससे उत्पन्न सामाजिक मुद्दों की समीक्षा करेगी

Press Trust of India | November 24, 2025 | 01:20 PM IST | 2 mins read

पिछले कुछ वर्षों में कोचिंग संस्थानों में दाख़िला लेने वाले छात्रों द्वारा पढ़ाई के दबाव के कारण आत्महत्या करने के मामले सामने आए हैं।

संसद का शीतकालीन सत्र एक दिसंबर से शुरू होगा। (प्रतीकात्मक-विकिमीडिया कॉमन्स)
संसद का शीतकालीन सत्र एक दिसंबर से शुरू होगा। (प्रतीकात्मक-विकिमीडिया कॉमन्स)

नई दिल्ली: तनाव के कारण छात्रों की आत्महत्या की बढ़ती घटनाओं के बीच एक संसदीय समिति ने प्रतियोगी परीक्षाओं में छात्रों की सहायता के लिए कोचिंग सेंटर के ‘‘प्रसार’’ और इससे उत्पन्न होने वाले सामाजिक मुद्दों की समीक्षा करने का निर्णय लिया है। शिक्षा, महिला, बाल, युवा और खेल संबंधी स्थायी समिति कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के प्रभाव और शिक्षा एवं विद्यार्थियों को इस उभरती प्रौद्योगिकी से लाभ की भी समीक्षा करेगी।

हाल में पीएम-श्री स्कूलों की समीक्षा का निर्णय लिया है। समिति प्रतियोगी परीक्षाओं में छात्रों की सहायता के लिए कोचिंग सेंटर के प्रसार, इससे उत्पन्न होने वाले सामाजिक मुद्दों और इस मामले पर मौजूदा कानून की समीक्षा करेगी।

मंत्रालय ने 9 सदस्यीय समिति गठित की

पिछले कुछ वर्षों में कोचिंग संस्थानों में दाख़िला लेने वाले छात्रों द्वारा पढ़ाई के दबाव के कारण आत्महत्या करने के मामले सामने आए हैं। केवल राजस्थान के कोटा शहर में ही ऐसे कई मामले सामने आए हैं।

शिक्षा मंत्रालय ने इस वर्ष की शुरुआत में नौ सदस्यीय समिति गठित की थी ताकि कोचिंग से जुड़े मुद्दों और ‘‘डमी स्कूलों’’ के उभरने की प्रवृत्ति के साथ-साथ प्रवेश परीक्षाओं की प्रभावशीलता और निष्पक्षता की भी जांच की जा सके।

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संसद का शीतकालीन सत्र 1 दिसंबर से

समिति स्कूल शिक्षा प्रणाली के संदर्भ में प्रतियोगी प्रवेश परीक्षाओं की निष्पक्षता तथा कोचिंग उद्योग के बढ़ते प्रभाव का अध्ययन कर रही है। लोकसभा सचिवालय के अनुसार, समिति एनसीईआरटी के कामकाज और प्रदर्शन की भी समीक्षा करेगी।

साथ ही भाषाई और धार्मिक अल्पसंख्यकों की शिक्षा को बढ़ावा देने के प्रयासों की भी जांच करेगी। समिति भारतीय उच्च शिक्षा परिषद (एचईसीआई) बनाने के लिए शिक्षा मंत्रालय के ‘‘प्रयासों’’ के संबंध में भी जानकारी मांगेगी।

यूजीसी जैसी संस्थाओं की जगह लेने वाले एक उच्च शिक्षा नियामक की स्थापना के लिए एक विधेयक संसद के शीतकालीन सत्र में पेश किया जाना निर्धारित है। संसद का शीतकालीन सत्र एक दिसंबर से शुरू होगा।

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