Abhay Pratap Singh | January 8, 2026 | 08:22 AM IST | 2 mins read
जांच में सामने आया है कि ठगों ने देश के विभिन्न प्रांतों के लोगों से नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी करके करीब 10 करोड़ रुपये की संपत्ति बनाई है।

नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश के बदायूं जिले में पुलिस ने 7 जनवरी को फर्जी कॉल सेंटर संचालित कर आम लोगों को नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी करने वाले गिरोह का भंडाफोड़ करते हुए तीन युवतियों समेत 5 अभियुक्तों को गिरफ्तार किया। अपर पुलिस अधीक्षक (नगर क्षेत्र) विजेंद्र कुमार द्विवेदी ने बताया कि आरोपी बैंक और अन्य वित्तीय संस्थानों में नौकरी दिलाने के नाम पर लोगों के साथ ठगी करते थे।
विजेंद्र कुमार ने बताया कि साइबर अपराध थाने में इस सिलसिले में दर्ज की गई एक रिपोर्ट की विवेचना में पोर्टल पर साइबर धोखाधड़ी से जुड़े एक मोबाइल नंबर का पता लगाया गया था और यह भी पता लगा कि सदर कोतवाली क्षेत्र के मोहल्ला नई सराय की एक गली में स्थित एक छोटे से मकान में साइबर ठगों का नेटवर्क संचालित किया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि पुलिस की टीम ने जब छापा मारा तो एक मकान में फर्जी कॉल सेंटर का संचालन होता मिला। उनके मुताबिक, पुलिस ने वहां काम कर रही तीन युवतियों और एक पुरुष को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से एक लैपटाप और साढ़े चार लाख रुपये नकद बरामद किए। पूछताछ और निशानदेही पर एक अन्य युवती को भी गिरफ्तार किया गया।
अपर पुलिस अधीक्षक ने बताया कि जांच में सामने आया है कि ठगों ने देश के विभिन्न प्रांतों के लोगों से नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी करके करीब 10 करोड़ रुपये की संपत्ति बनाई है। उन्होंने बताया कि शातिर आरोपी फर्जी खातों और पहचान का इस्तेमाल कर भोले भाले लोगों को अपने जाल में फंसाते थे।
उनके अनुसार, पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि वे 'वर्क इंडिया साइट' के माध्यम से बिहार, महाराष्ट्र, राजस्थान, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश सहित विभिन्न राज्यों के लोगों का नौकरी दिलाने के नाम पर पंजीकरण करते थे और फिर अपने बैंक खातों में रकम डलवाकर ठगी करते थे।
विजेंद्र कुमार द्विवेदी ने बताया कि गिरफ्तार आरोपियों में विवेक, संस्कार पटेल, अंशू पटेल, ईशा साहू और मीनाक्षी शामिल हैं। वे अलग-अलग नामों से फर्जी आईडी बनाकर साइबर ठगी की घटना को अंजाम दे रहे थे। सभी आरोपियों को अदालत में पेश कर जेल भेज दिया गया है।