Santosh Kumar | February 5, 2026 | 10:29 AM IST | 2 mins read
क्लैट यूजी तीसरी एडमिशन लिस्ट, जिसे पहले 5 फरवरी को जारी किया जाना था, उसे अगले नोटिस तक रोक दिया गया है।

प्रयागराज: इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालयों (एनएलयू) के 'कंसोर्टियम' को 'क्लैट यूजी 2026' के लिए संशोधित मेधा सूची बनाने का निर्देश दिया। हालांकि, अदालत ने यह भी कहा कि पहले दौर की काउंसलिंग के दौरान प्रवेश ले चुके विद्यार्थियों को परेशान नहीं किया जाएगा। 'क्लैट-2026' की परीक्षा 7 दिसंबर, 2025 को हुई। न्यायमूर्ति विवेक सरन ने क्लैट में शामिल हुए छात्र अवनीश गुप्ता की याचिका आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए यह आदेश दिया।
कोर्ट ने यह आदेश इसलिए दिया क्योंकि हाई-पावर्ड "इंस्पेक्शन कमेटी" ने एक विवादित सवाल पर सब्जेक्ट मैटर एक्सपर्ट्स की राय को मनमाने ढंग से नजरअंदाज कर दिया और ऐसा करने का कोई कारण भी नहीं बताया।
याचिकाकर्ता ने 'बुकलेट-सी' के प्रश्न 6, 9 और 13 के उत्तर को चुनौती देते हुए कोर्ट का रुख किया। अदालत ने प्रश्न 6 और 13 पर हस्तक्षेप करने से इनकार किया, लेकिन प्रश्न 9 के "बी" और "डी" दोनों विकल्पों को सही उत्तर मानने का आदेश दिया।
अदालत ने निर्देश दिया कि प्रश्न संख्या 9 के मामले में एनएलयू कंसोर्टियम “बी” और “डी” दोनों विकल्पों को सही उत्तर माने। इसके आधार पर संशोधित मेरिट लिस्ट तैयार की जाए और उसे एक महीने के भीतर दोबारा जारी किया जाए।
सीएनएलयू ने इस संबंध में एक नोटिफिकेशन भी जारी किया है। नोटिफिकेशन में बताया गया है कि इस निर्देश का काउंसलिंग शेड्यूल पर क्या असर पड़ेगा। उम्मीदवार ऑफिशियल वेबसाइट पर नोटिफिकेशन देख सकते हैं।
तीसरी अंडरग्रेजुएट एडमिशन लिस्ट, जिसे पहले 5 फरवरी को जारी किया जाना था, उसे अगले नोटिस तक रोक दिया गया है। अपील प्रक्रिया पर फैसला आने के बाद सीएनएलयू द्वारा एक नया काउंसलिंग शेड्यूल जारी किया जाएगा।
कंसोर्टियम ने कहा है कि जिन छात्रों को काउंसलिंग के पहले और दूसरे राउंड में पहले ही सीटें मिल चुकी हैं, उन पर कोई असर नहीं पड़ेगा, और यह सुनिश्चित करने के लिए सभी जरूरी कानूनी कदम उठाए जाएंगे।
यूजीसी नेट 2025 परीक्षा 31 दिसंबर, 2025 से 7 जनवरी, 2026 तक अलग-अलग शिफ्ट में कंप्यूटर-बेस्ड मोड में आयोजित की गई। लाखों उम्मीदवार यूजीसी नेट रिजल्ट का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं, क्योंकि ये असिस्टेंट प्रोफेसर और जूनियर रिसर्च फेलोशिप (जेआरएफ) पदों के लिए पात्रता तय करते हैं।
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