Santosh Kumar | August 4, 2026 | 11:46 AM IST | 3 mins read
कर्नाटक, हरियाणा और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में भी हजारों टीचिंग पोस्ट वेकेंट हैं। यह समस्या केवला कुछ राज्यों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि देश की पूरी शिक्षा प्रणाली के लिए बड़ी चुनौती है, जिस पर सरकार को तुरंत ध्यान देने की जरूरत है।

नई दिल्ली: भारत का स्कूली शिक्षा सिस्टम शिक्षकों की भारी कमी से जूझ रहा है। नीति आयोग की हालिया रिपोर्ट से पता चलता है कि देश भर के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों के लाखों पद खाली पड़े हैं, जिससे शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। सबसे चिंताजनक स्थिति बिहार में है, जहां प्राइमरी लेवल पर शिक्षकों के 2.08 लाख से अधिक पद खाली हैं। इसके अलावा, सेकेंडरी लेवल पर 36,035 और सीनियर सेकेंडरी लेवल पर 33,035 पद खाली हैं, जिससे राज्य में शिक्षकों के खाली पदों की कुल संख्या लगभग 2.77 लाख हो जाती है।
यह रिपोर्ट ऐसे समय में आई है जब स्कूली शिक्षा की गुणवत्ता और सीखने के नतीजों को बेहतर बनाने पर लगातार जोर दिया जा रहा है। बिहार के अलावा झारखंड और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में शिक्षकों के बहुत सारे पद रिक्त पड़े हैं।
कर्नाटक, हरियाणा और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में भी हजारों टीचिंग पोस्ट रिक्त हैं। यह समस्या केवल कुछ राज्यों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि देश की पूरी शिक्षा प्रणाली के लिए बड़ी चुनौती है, जिस पर सरकार को तुरंत ध्यान देने की जरूरत है।
विधानसभा में दिए गए जवाब के अनुसार, एमपी के सरकारी स्कूलों में कुल 72,950 टीचिंग पद खाली हैं। इनमें से सबसे अधिक पद (44,759) मिडिल स्कूलों में हैं, जबकि प्राइमरी लेवल पर 13,683 और हायर सेकेंडरी लेवल पर 14,508 पद रिक्त हैं।
खबर है कि सिंगरौली, छतरपुर और शिवपुरी जैसे जिलों में हालात सबसे अधिक खराब हैं। स्कूल गेस्ट टीचरों पर निर्भर हैं; जहां सोशल साइंस के टीचर हिंदी पढ़ा रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, झारखंड में भी करीब एक लाख पद रिक्त हैं।
केंद्र सरकार के शिक्षा मंत्रालय की 'समग्र शिक्षा योजना' के तहत प्रोजेक्ट अप्रूवल बोर्ड की बैठक (मई 2026) के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, उत्तर प्रदेश के सरकारी स्कूलों में कुल मिलाकर लगभग 81,821 शिक्षकों के पद खाली हैं।
इनमें से प्राइमरी लेवल पर मंजूर 2,50,488 पदों में से 77,400 पद और सेकेंडरी लेवल पर मंज़ूर 11,083 पदों में से 4,421 पद खाली घोषित किए गए हैं। हरियाणा और राजस्थान जैसे हिंदी भाषी राज्यों में भी हजारों पद खाली हैं।
भारत में राज्य-वार शिक्षकों के रिक्त पदों के बारे में जानकारी नीचे तालिका में दी गई है-
राज्य/केंद्रशासित प्रदेश | शिक्षक रिक्तियां |
|---|---|
आंध्र प्रदेश | विवरण उपलब्ध नहीं |
अरुणाचल प्रदेश | 1,254 प्राथमिक; 564 माध्यमिक; 140 वरिष्ठ माध्यमिक |
बिहार | 2,08,784 प्राथमिक; 36,035 माध्यमिक; 33,035 वरिष्ठ माध्यमिक |
चंडीगढ़ | विवरण उपलब्ध नहीं |
छत्तीसगढ़ | विवरण उपलब्ध नहीं |
दादरा एवं नगर हवेली | 115 प्राथमिक; 4 माध्यमिक |
दिल्ली | कोई रिक्ति नहीं |
गोवा | 306 प्राथमिक; 311 माध्यमिक; 231 वरिष्ठ माध्यमिक |
हरियाणा | 7,626 प्राथमिक; 4,070 माध्यमिक; 3,847 वरिष्ठ माध्यमिक |
हिमाचल प्रदेश | 3,654 प्राथमिक; 565 माध्यमिक |
जम्मू-कश्मीर | विवरण उपलब्ध नहीं |
झारखंड | 80,341 प्राथमिक; 18,343 माध्यमिक; 881 वरिष्ठ माध्यमिक |
कर्नाटक | 29,473 प्राथमिक; 8,690 माध्यमिक |
केरल | कोई रिक्ति नहीं |
लक्षद्वीप | विवरण उपलब्ध नहीं |
महाराष्ट्र | 8,254 प्राथमिक; 660 माध्यमिक; 65 वरिष्ठ माध्यमिक |
मेघालय | 0 प्राथमिक; 0 माध्यमिक; 16 वरिष्ठ माध्यमिक |
मिजोरम | 122 प्राथमिक; 9 माध्यमिक |
नागालैंड | कोई रिक्ति नहीं |
पुडुचेरी | विवरण उपलब्ध नहीं |
पंजाब | 1,546 प्राथमिक; 961 माध्यमिक; 3,916 वरिष्ठ माध्यमिक |
राजस्थान | 3,856 प्राथमिक; 1,365 माध्यमिक; 14,949 वरिष्ठ माध्यमिक |
सिक्किम | कोई रिक्ति नहीं |
तमिलनाडु | 170 प्राथमिक; 4,278 माध्यमिक; 693 वरिष्ठ माध्यमिक |
तेलंगाना | विवरण उपलब्ध नहीं |
त्रिपुरा | 6,006 प्राथमिक; 843 माध्यमिक; 1,171 वरिष्ठ माध्यमिक |
उत्तराखंड | 3,932 प्राथमिक; 1,737 माध्यमिक; 1,329 वरिष्ठ माध्यमिक |
पश्चिम बंगाल | 5,530 प्राथमिक; 33,369 माध्यमिक; 38,899 वरिष्ठ माध्यमिक |